*राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के मद्देनजर SIR प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का बड़ा कानूनी मोर्चा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के मद्देनजर SIR प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का बड़ा कानूनी मोर्चा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

       *Press wire| Congress |12 Oct*



मुंबई | लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के 10 अन्य नेताओं ने सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। यह याचिका निर्वाचन आयोग की विवादास्पद‘'विशेष गहन पुनरीक्षण’'Special Intensive Revision SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती देती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार 13 अक्टूबर को इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर सकती है। याचिका की मुख्य मांगें और आधार के बारे में जाने तो राहुल गांधी की लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में निर्धारित समय सीमा शाम 4:30 बजे के बाद अतिरिक्त समय मांगकर व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल की। यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस. प्रसन्ना के माध्यम से दायर की गई है। इस याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल है। वह देखें तो SIR प्रक्रिया पर रोक के मद्देनजर ‘'वोट चोरी’'के आरोपों को लेकर SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग। CEC का इस्तीफा आवश्यक। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। स्वतंत्र जांच समिति का गठन ‌ SIR और निर्वाचन आयोग के निर्णय प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध। इनके रिकॉर्ड की जांच के मद्देनजर SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड और आधिकारिक नोटिंग को अदालत में पेश करने का निर्देश साथ में ECINet पोर्टल की समीक्षा जरूरी । ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण तंत्र की पुनर्समीक्षा की मांग।याचिका में निर्वाचन आयोग,मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार,चुनाव आयुक्त एसएस सिंधु और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। इस जनयाचिका में 11 विपक्षी नेताओं के दस्तखत है। यह जनहित याचिका है। जिसमें इंडिया गठबंधन के कुल 11 नेताओं ने दस्तखत किए हैं। राहुल गांधी मुख्य याचिकाकर्ता हैं। अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव,राजद नेता तेजस्वी यादव,तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय,शिवसेना (UBT) के संजय राउत,CPI(M) महासचिव एमए बेबी, CPI नेता डी राजा,झामुमो सांसद महुआ माझी, राष्ट्रवादी कांग्रेस की नेता सुप्रिया सुले और ईटी के मोहम्मद शबीर शामिल हैं। CJI ने मुलाकात से किया इनकार के मद्देनजर याचिका दायर करने से पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था ताकि SIR और CEC के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा जा सके हालांकि CJI ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। यह कहते हुए कि इससे जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं और वह प्रशासनिक पक्ष से कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते। CJI ने कहा कि विपक्षी नेता न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अदालत में याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं। CJI ने यह भी संकेत दिया कि SIR से संबंधित अन्य मामले मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं और नई याचिका को उनके साथ सुना जा सकता है। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और मार्च के मद्देनजर याचिका दायर करने के साथ ही इंडिया गठबंधन ने ‘'चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी'’के तहत कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकाला। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मार्च का नेतृत्व किया। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह लड़ाई संविधान को बचाने की है। यह राहुल गांधी या नरेंद्र मोदी की लड़ाई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और जानकारी साझा कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए और कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद कर दिए। पिछले सप्ताहांत में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था।


 

 जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई कर पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में न लेने का निर्देश दिया था। निर्वाचन आयोग के रुख के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को“निराधार”बताया है। आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया के खिलाफ कोई औपचारिक अपील दायर नहीं की गई और मतदाता सूची में बदलाव पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किए गए हैं। आयोग ने फॉर्म 6 में कथित बदलावों को लेकर भी राहुल गांधी के दावों को “भ्रामक” बताया है। सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़े कई मामले पहले से लंबित हैं। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले निर्वाचन आयोग को SIR करने का अधिकार बरकरार रखा है। राहुल गांधी की नई याचिका को इन लंबित मामलों के साथ सुना जा सकता है। मंगलवार की सुनवाई में यह तय हो सकता है कि याचिका पर तत्काल सुनवाई होगी या नहीं। यह मामला न केवल निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता से जुड़ा है बल्कि साल 2029 के आम चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल भी उठाता है। इस मामले की मुख्य तथ्यात्मक जानकारी के मद्देनजर याचिका का विवरण देखें तो यह रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी बनाम भारत निर्वाचन आयोग,डायरी नंबर 64196/2026 के रूप में दर्ज की गई है। जिसे 12 अक्टूबर 2026 को अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) एस.प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल किया गया। शाम 4:37 बजे फाइल की गई इस याचिका की स्थिति फिलहाल लंबित है। इस याचिका की विशिष्ट मांगे जाने तो CEC के इस्तीफे की मांग के अलावा याचिका में सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट रूप से यह भी अनुरोध किया गया है कि SIR की पूरी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के आंतरिक निर्णय तंत्र की जांच के लिए स्वतंत्र जांच समिति का गठन। SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड और आधिकारिक नोटिंग अदालत में पेश करने का निर्देश। ECINet पोर्टल सहित ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण तंत्र की पुनर्समीक्षा। हस्ताक्षरकर्ताओं की पूरी सूची के मद्देनजर यह याचिका 11 विपक्षी नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है। जिनमें राहुल गांधी,कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव,राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय,शिवसेना (UBT) के संजय राउत,CPI(M) के एमए बेबी,CPI के डी राजा, झामुमो सांसद महुआ मांझी,राष्ट्रवादी कांग्रेस की सुप्रिया सुले और ईटी के मोहम्मद शब्बीर शामिल हैं।“13.9 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने” का विवाद। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि हटाए गए 13.39 करोड़ मतदाता ASDD श्रेणी (Absent, Permanently Shifted, Dead, Duplicate अनुपस्थित,स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, दोहराव) के अंतर्गत आते हैं और पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुनःपंजीकरण करा सकते हैं। भाजपा ने श्रेणीवार आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इनमें 2.8 करोड़ मृतक,6.3 करोड़ स्थानांतरित, 1 करोड़ दोहराव और लगभग 3 करोड़ अन्य श्रेणी के हैं। 



CEC की “एकपक्षीय निर्णय प्रक्रिया” पर विवाद जाने तो "द इंडियन एक्सप्रेस"  की जांच रिपोर्ट के अनुसार CEC ज्ञानेश कुमार ने SIR प्रक्रिया के दौरान 14 प्रमुख निर्णय एकपक्षीय रूप से लिए भले ही अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को इस मामले पर निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था लेकिन CEC को पद से हटाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रियात्मक प्रतिक्रिया समझे तो CJI सूर्यकांत ने मुलाकात के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए अपने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह मामला (SIR) अदालत के न्यायिक पक्ष में लंबित (sub judice) है। CJI उसी पीठ का नेतृत्व करते हैं। CJI प्रशासनिक पक्ष से कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते। यदि राहुल गांधी और खड़गे सुने जाना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकते हैं। यह मामला मंगलवार (13 अक्टूबर) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। वे कल भी याचिका दायर कर सकते हैं। यह याचिका स्वीकार की जाएगी।इसी दौरान फॉर्म 6 पर विवाद जाने तो विवाद का एक अन्य केंद्र बिंदु SIR के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा संशोधित फॉर्म 6 नए मतदाता पंजीकरण आवेदन पत्र है। 




निर्वाचन आयोग ने संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में मई 2026 के अपने फैसले में संशोधित फॉर्म 6 घोषणा को “बरकरार” रखा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि कोई भी संशोधित फॉर्म 6 हमारे द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है। और कहा कि संशोधित फॉर्म 6 बिहार SIR मामले की सुनवाई के समय मौजूद ही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को एक और आदेश में स्पष्ट किया कि उसने संशोधित फॉर्म 6 को न तो अनुमोदित किया है और न ही अस्वीकार किया है। दौरान “चलो दिल्ली” मार्च और पुलिस के साथ टकराव के मद्देनजर12 अक्टूबर के मार्च को “चलो दिल्ली  मार्च फॉर डेमोक्रेसी” नाम दिया गया। जो कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया। दिल्ली पुलिस ने भगवंत दास रोड (सुप्रीम कोर्ट के पास) पर बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया। दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में रद्द कर दिया और तीन वैकल्पिक स्थान निर्दिष्ट किए। मार्च के दौरान मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। जिन्हें शाम 5 बजे फिर से खोल दिया गया। राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि March for Democracy.March for Justice. Chalo Dilli.। अब आगे की सुनवाई पर नजर जरूरी ‌। 13 अक्टूबर (मंगलवार) की सुनवाई में कई संबंधित मामलों पर एक साथ विचार किया जाएगा। जिनमें अधिवक्ताओं की नजरबंदी की याचिका,दिल्ली मेट्रो सेवा बंद होने से जुड़ी अवमानना याचिका और SIR से जुड़ी कई चुनौतियां शामिल हैं। राहुल गांधी की नई याचिका को इन मामलों के साथ संयुक्त रूप से सुना जा सकता है। CJI ने पहले कहा था कि नई दायर याचिका “अन्य लंबित मामलों के साथ सुनी जा सकती है”।

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