*महाराष्ट्र:SIR में हटाए गए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 में तीन बदलाव प्रस्तावित,निर्वाचन आयोग की मंजूरी बाकी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*महाराष्ट्र:SIR में हटाए गए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 में तीन बदलाव प्रस्तावित,निर्वाचन आयोग की मंजूरी बाकी*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 




     *Press wire |  Maharashtra | 18 Oct*


मुंबई |महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पिछले सप्ताह मतदाता प्रपत्र 6 यानी फॉर्म 6 में तीन बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सूची से हटाए गए मतदाताओं को राहत देने और उनके पुनः पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। एक न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा फॉर्म 6 से एक तरह का भ्रम पैदा हो रहा है। इसमें पुनः पंजीकरण कराने वाले मतदाताओं को पहली बार आवेदन करने वाले व्यक्ति के रूप में माना जाता है। प्रस्तावित तीन बदलावों का मकसद इसी भ्रम को दूर करना है ताकि SIR में हटाए गए मतदाता अपना पुनः पंजीकरण आसानी से करा सकें हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तक इन प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी नहीं दी है यानि फिलहाल यह प्रस्ताव मंजूरी के इंतजार में है और इसके लागू होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस.चोकलिंगम के कार्यालय ने पिछले सप्ताह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक प्रस्ताव भेजकर मतदाता प्रपत्र 6 यानि फॉर्म 6 में तीन संशोधनों की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं के पुनः पंजीकरण को आसान बनाना है। प्रस्तावित तीन बदलाव क्या हैं? वह जाने तो महाराष्ट्र CEO द्वारा सुझाए गए तीन प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं। वह जाने तो फॉर्म के शीर्षक से"नए मतदाता"New Voters शब्द हटाना। वर्तमान में फॉर्म 6 का शीर्षक "नए मतदाताओं के लिए आवेदन पत्र" है। जिससे पहले से पंजीकृत मतदाताओं को भ्रम होता है। पूर्व-पंजीकृत मतदाताओं के लिए वैकल्पिक घोषणा पत्र जोड़ना। ऐसे आवेदकों के लिए अलग घोषणा का प्रावधान‌। जो पहले किसी विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत थे लेकिन अब कहीं भी नामांकित नहीं हैं और दोबारा शामिल होना चाहते हैं। पुराने EPIC नंबर का उल्लेख करने की अनुमति देना अहम । आवेदक अपना पिछला इलेक्टर फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) नंबर दे सकेंगे। जिससे अधिकारी उनके पहले के पंजीकरण का पता लगा सकें और "पुनःसमावेशन" तथा"नए नामांकन"के बीच अंतर स्पष्ट हो सके। यह बदलाव क्यों जरूरी है? वह समझे तो वर्तमान फॉर्म 6 में आवेदक को यह घोषित करना होता है कि वह"पहली बार"मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर रहा है। SIR में नाम कटने के बाद जब पुराने मतदाताओं को दोबारा फॉर्म 6 भरने के लिए कहा जा रहा है तो वे यह घोषणा करने से हिचकिचा रहे हैं क्योंकि ऐसा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम,1950 की धारा 31 के तहत झूठी घोषणा माना जा सकता है। जिसमें एक वर्ष तक की जेल,जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यही कानूनी भय मतदाताओं को पुनः पंजीकरण से रोक रहा है। जिससे चुनाव अधिकारियों को भी काम में कठिनाई हो रही है। SIR की समय-सीमा और आगे की राह देखें तो महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय-सीमा 26 अक्टूबर है। जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित होनी निर्धारित है हालांकि यह प्रस्ताव अभी केवल एक सिफारिश है और ECI द्वारा मंजूर नहीं हुआ है। इसके क्रियान्वयन के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्वीकृतियों की आवश्यकता होगी। इस बीच बॉम्बे उच्च न्यायालय में ECI ने कहा है कि SIR के दौरान हटाए गए मतदाता का फॉर्म 6 भरना झूठी घोषणा नहीं है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने फॉर्म 6 में किसी भी तरह के बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। यह प्रस्ताव इसी कानूनी असमंजस को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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