*RBI की आक्रामक मौद्रिक सख्ती:रेपो रेट में 75-100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी की संभावना, दिसंबर में बड़ा झटका*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


       
             *Press Wire | RBI |12 Oct*








 मुंबई | देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में रेपो रेट में बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स (SBI Caps) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई मौजूदा मौद्रिक सख्ती के दौर में रेपो रेट में कुल 75 से 100 बेसिस पॉइंट्स (bps) यानी 0.75% से 1% तक की बढ़ोतरी कर सकता है। दिसंबर में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका के मद्देनजर रिपोर्ट के मुताबिक दरों में क्रमिक बढ़ोतरी का रुख बना रहेगा लेकिन सितंबर और अक्टूबर के महंगाई आंकड़ों के आधार पर दिसंबर 2026 में एक बड़ी बढ़ोतरी 50 बेसिस पॉइंट्स तक से इनकार नहीं किया जा सकता। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने हाल ही में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया था और अपना रुख"न्यूट्रल"से बदलकर"कैलिब्रेटेड टाइटनिंग"कर दिया था। आम आदमी की EMI पर असर जाने तो रेपो रेट में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा क्योंकि बैंकों द्वारा होम लोन,ऑटो लोन और अन्य व्यक्तिगत ऋणों की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे मासिक किस्त (EMI) महंगी हो जाएगी। महंगाई और विकास दर का परिदृश्य समझे तो रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि खुदरा महंगाई दर (CPI) वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में चरम पर पहुंच सकती है। जबकि थोक महंगाई दर (WPI) मार्च 2027 से कम होनी शुरू हो सकती है। दूसरी ओर देश की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई। जो बाजार के 7.1% के अनुमान से अधिक है हालांकि रिपोर्ट में बढ़ती उधारी लागत,कमजोर ग्रामीण मांग और सूखे जैसी स्थितियों के कारण वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में खपत पर दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। बॉन्ड यील्ड और बैंकिंग क्षेत्र को जाने तो बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में कैलेंडर वर्ष 2026 में लगभग 70 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है हालांकि ऊंची ब्याज दरें निकट भविष्य में बैंकों के मार्जिन के लिए फायदेमंद मानी जा रही हैं। एसबीआई कैप्स का यह अनुमान आगामी मौद्रिक नीतियों के लिए एक बड़ा संकेत है अगर आरबीआई इसी रफ्तार से दरें बढ़ाता है तो आने वाले महीनों में लोन लेने वालों को अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। RBI की मौद्रिक नीति के मद्देनजर ऐतिहासिक तुलना,लोन संचरण तंत्र और आगे की राह देखें तो ऐतिहासिक चक्र की तुलना। यह सख्ती पहले से अधिक "संतुलित"और अनुमानित है। साल 2022 से 2023 के बीच आरबीआई द्वारा की गई 250 बेसिस पॉइंट्स (2.5%) की आक्रामक बढ़ोतरी के मुकाबले मौजूदा चक्र काफी हद तक "संतुलित"और पहले से अनुमानित है। नीतिगत संकेतों में अंतर के हिसाब से साल 2022 में आरबीआई ने अचानक (off-cycle) 40 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की थी। जिससे बाजार चौंक गया था और निफ्टी 50 में एक दिन में 391.50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके विपरीत इस साल 2026 की बढ़ोतरी पूरी तरह से बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप है। नीतिगत उपकरण के बारे में जाने तो साल 2022 में आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) को 50 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 4.5% किया था। जिससे बैंकिंग प्रणाली से 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की तरलता खींची गई थी। इस बार CRR का उपयोग नहीं किया गया है। बृहद आर्थिक पृष्ठभूमि के मद्देनजर साल 2022 की तरह ही इस बार भी भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल। जो साल 2022 के 107 डॉलर के करीब है । खुदरा ऋण संचरण तंत्र के मद्देनजर सभी उधारकर्ताओं पर तत्काल असर नहीं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर ऋण के प्रकार और पुनर्मूल्यांकन तंत्र पर निर्भर करता है। फ्लोटिंग रेट लोन (EBLR से जुड़े) जून 2026 के अंत तक 68% से अधिक फ्लोटिंग रेट लोन बाहरी बेंचमार्क दर (EBLR) से जुड़े हुए हैं। ऐसे उधारकर्ताओं को अगले भुगतान चक्र में तुरंत EMI बढ़ने या अवधि बढ़ने का सामना करना पड़ेगा। प्रभाव गणना के मद्देनजर 1 करोड़ रुपये के 20 साल के होम लोन पर यदि ब्याज दर 7.15% से बढ़कर 7.40% हो जाती है तो मासिक EMI 78,433 रुपये से बढ़कर 79,949 रुपये हो जाएगी यानि हर महीने 1,500 रुपये से अधिक का अतिरिक्त खर्च। कॉर्पोरेट लोन (MCLR से जुड़े) कॉर्पोरेट ऋण सीमांत लागत निधि दर (MCLR) से जुड़े होते हैं। जो जमा दरों पर निर्भर करती है। जमा दरों का पुनर्मूल्यांकन आमतौर पर 2 से 3 तिमाहियों में होता है इसलिए कॉर्पोरेट लोन पर ब्याज दरों का संचरण खुदरा ऋणों की तुलना में धीमा रहता है। इसका फिक्स्ड रेट लोन इन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की स्थिति और आगे की राह जाने तो  सर्वसम्मत निर्णय के मद्देनजर एमपीसी के सभी छह सदस्यों ने 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया और नीतिगत रुख को"तटस्थ" से "सुव्यवस्थित कड़े रुख"(Calibrated Tightening) में बदल दिया। दरों में कटौती की संभावना खत्म। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती "विचाराधीन नहीं"है। आगे की कार्रवाई या तो दरों में बढ़ोतरी होगी या यथावत रखना। बाजार के अनुमान के मद्देनजर अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर 2026 और फरवरी 2027 की एमपीसी बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है। मुख्य अनुमान और जोखिम कारक जाने तो मुद्रास्फीति का अनुमान के हिसाब से आरबीआई ने वित्त साल 2027 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। कोर मुद्रास्फीति 4.4% रहने का अनुमान है। जीडीपी वृद्धि दर के लिए वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.1% रहने का अनुमान है। जिसमें दूसरी तिमाही में 7.2%, तीसरी में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने की संभावना है यानि वृद्धि की गति धीरे-धीरे कम होगी। प्रमुख जोखिम के हिसाब से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो की स्थिति कृषि और ग्रामीण मांग के लिए खतरा है। लगातार भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल लागत दबाव बढ़ा सकती हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती पैदावार और उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी वैश्विक वित्तीय दबाव को और बढ़ा सकती है। बॉन्ड बाजार और बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव देखें तो बॉन्ड यील्ड की स्थिति देखें उ10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक लगभग 70 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो चुकी है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आने तक यह ऊंची बनी रह सकती है। बैंक मार्जिन (NIM) के बारे में जाने तो अल्पावधि में ऊंची ब्याज दरें बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) के लिए फायदेमंद मानी जा रही हैं लेकिन वित्त वर्ष 2027 के अंत तक गैर-खाद्य ऋण वृद्धि धीमी पड़ सकती है।

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