*तिरंगा फहराना कौन-सा अपराध? CJP के दो नेताओं को तिहाड़ जेल भेजने से विवाद भड़का,अभिजीत दीपके ने पूछा,‘आखिर उनका गुनाह क्या है?’*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*तिरंगा फहराना कौन-सा अपराध?CJP के दो नेताओं को तिहाड़ जेल भेजने से विवाद भड़का,अभिजीत दीपके ने पूछा,‘आखिर उनका गुनाह क्या है?’*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 






                 •Press wire|  CJP |14 Oct•

मुंबई| कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया और तिहाड़ जेल पहुंचा दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तुरंत सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि “उनका अपराध क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना?इस घटना ने दिल्ली पुलिस और CJP के बीच जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर टकराव को नए शिखर पर पहुंचा दिया है। घटना का तत्काल कारण दिल्ली पुलिस का 11 अक्टूबर का वह आदेश है, जिसमें जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थलों की सूची से हटा दिया गया और रामलीला मैदान, बुलारी मैदान तथा पूर्वी दिल्ली सीबीडी मैदान को वैकल्पिक विरोध स्थल बनाया गया। CJP ने तुरंत इस फैसले को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि विरोध स्थल को राष्ट्रीय राजनीतिक केंद्र से बाहर करने से जन प्रदर्शन की दृश्यता और प्रभाव कमजोर होगा।घटनाक्रम के बारे में जाने तो सुबह बैरिकेडिंग पार कर तिरंगा फहराया। उसी दिन गिरफ्तार।13 अक्टूबर की सुबह दास,रांका और CJP सदस्य अजिंक्य शिंदे समेत 14 लोगों ने जंतर-मंतर के उस इलाके में घुसने की कोशिश की। जहां की विरोध-अनुमति रद्द कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक उन्होंने आसपास के खाने-पीने की दुकानों और फूड स्टॉलों से “निजी परिसरों से अवैध रूप से गुजरते हुए”उस इलाके में प्रवेश किया और बंद दरवाजे तथा पुलिस बैरिकेडिंग फांदी। अंदर जाने के बाद उन्होंने तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त जनेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते नारे लगाए। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और उन्हें हिरासत में ले लिया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि ये नेता “बार-बार कानून तोड़ने की कोशिश”कर रहे थे और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर दूसरों को भी ऐसी गतिविधियों के लिए“उकसा”रहे थे इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के संबंधित निवारक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की। जिसमें अवैध प्रवेश, आदेश का उल्लंघन,शांति बांड की शर्तों का उल्लंघन और सरकारी कर्मचारी को काम में बाधा डालने के आरोप शामिल हैं। मुख्य विवाद समझे तो शांति बांड का उल्लंघन बताया गया। मामले का अहम मोड़ यह है कि दास और रांका पहले भी 10 अक्टूबर को एक बार हिरासत में लिए जा चुके थे। उस समय मुंबई से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पुलिस उन्हें ले गई थी। इसके बाद 11 अक्टूबर को उन्हें 50,000 रुपये की जमानत राशि और एक साल तक शांति तथा अच्छे व्यवहार बनाए रखने के वादे पर रिहा किया गया था। इसी वजह से इस बार दोनों के दोबारा जंतर-मंतर में जाने को पुलिस ने “शांति बांड की शर्तों का उल्लंघन”और “बार-बार कानून तोड़ना” माना। अदालत ने इस आधार पर दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। जबकि शिंदे को 5,000 रुपये के व्यक्तिगत बांड और छह महीने तक शांति तथा अच्छे व्यवहार बनाए रखने के वादे पर रिहा कर दिया गया हालांकि CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने पुलिस के आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि पुलिस ने अदालत में जो दावा किया कि “किसी ने दूसरे प्रदर्शनकारियों को कल जंतर-मंतर आने की अपील की थी”‌। वह “पूरी तरह झूठा” है और “किसी भी तरह की सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी। दीपके ने पूछा कि “तिरंगा फहराना कौन-सा अपराध है?”घटना के बाद CJP के संस्थापक दीपके ने कड़े शब्दों में बयान दिया। उन्होंने सवाल किया कि हमारी टीम आज सुबह जंतर-मंतर गई और तिरंगा फहराया। तिरंगा फहराना कब से अपराध हो गया? जो भी यह मानता है कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना अपराध है। वह देशद्रोही है। उन्होंने इस कार्रवाई को “अधिनायकवादी मानसिकता का सबसे बड़ा उदाहरण”बताया और चेतावनी दी। “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नहीं। यह प्रतिरोध की भावना है।” एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए लिखा कि “थोड़ी हिम्मत दिखाइए, @narendramodi। अगर आप dissent को दबाने के लिए इतने ही आतुर हैं तो साहस दिखाकर औपचारिक रूप से आपातकाल घोषित करें। इन कायरतापूर्ण तरीकों के पीछे छिपने के बजाय। दीपके ने हिरासत में लिए गए लोगों के कानूनी अधिकारों पर भी चिंता जताई और पुलिस से अपील की कि उन्हें वकील से बात करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि जैसा मेरे साथ हुआ। उन्हें भी 24 घंटे हिरासत में रखा जाए और वकील से बात करने न दिया जाए। विपक्ष ने आवाज उठाई वह जाने तो राहुल गांधी ने कहा “कायरतापूर्ण कदम”। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर दास और रांका की पांच दिन की न्यायिक हिरासत को “कायरतापूर्ण कदम” बताया और कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना “अपराध नहीं है।” गांधी ने कहा कि “जंतर-मंतर भारतीय जनता का है। हम उसे वापस लेंगे। यह रुख व्यापक विपक्षी खेमे की स्थिति के अनुरूप है। जंतर-मंतर की विरोध-अनुमति रद्द किए जाने के फैसले के बाद विपक्ष ने पहले ही कड़ी निंदा की थी। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने चेतावनी दी थी कि ये प्रतिबंध और बढ़ सकते हैं। व्यापक पृष्ठभूमि के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ विरोध की लहर। यह घटना अलग-अलग नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त जनेश कुमार और मतदाता सूची के “विशेष गहन संशोधन” (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। CJP और अन्य संगठन कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और SIR प्रक्रिया वापस लेने की बात कह रहे हैं क्योंकि उनका तर्क है कि इससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम गलती से हट सकते हैं। 10 अक्टूबर को CJP ने “जंतर-मंतर 2.0” विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था के आधार पर अनुमति देने से इनकार कर दिया और दीपके,दास तथा रांका को पहले ही हिरासत में ले लिया। उस समय 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। जिनमें विपक्षी नेता, कार्यकर्ता,छात्र नेता और पत्रकार शामिल थे। 10 अक्टूबर को ही भारतीय विपक्षी गठबंधन (INDIA bloc) ने भी मध्य दिल्ली में बिना अनुमति के मार्च निकाला था। जिसके बाद पुलिस ने दो थानों में मामला दर्ज किया और प्रदर्शनकारियों पर बैरिकेडिंग तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में जंतर-मंतर की विरोध-अनुमति रद्द किए जाने को नागरिकों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर प्रतिबंधों के बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है। जैसा कि CJP ने चेतावनी दी थी। आज मोदी ने जंतर-मंतर रद्द कर दिया कल वह लोकतंत्र रद्द कर देंगे। कानूनी प्रक्रिया जारी है ‌। वह देखें तो दास और रांका इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं और पांच दिन बाद फिर अदालत में पेश होंगे। शिंदे रिहा हो चुके हैं। CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख सिंह ने यह भी बताया कि तीनों नेताओं को संसद मार्ग पुलिस थाने ले जाने से पहले देर रात तक वकील से मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें तड़के 3 बजे निजी वाहन से ले जाया गया। मामले की कानूनी प्रक्रिया आने वाले दिनों में जारी रहने की उम्मीद है। तिहाड़ जेल विवाद में तथ्य,कानूनी पेच और व्यापक संदर्भ के हिसाब से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजकर तिहाड़ जेल पहुंचा दिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद हुई। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे"अधिनायकवादी कार्रवाई"बताते हुए सवाल किया।"उनका अपराध क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना?"घटनाक्रम का विस्तृत ब्यौरा जाने तो 10 अक्टूबर को पहली हिरासत और शांति बांड के मद्देनजर सीजेपी ने "जंतर-मंतर 2.0" विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया और दीपके,दास तथा रांका को निवारक हिरासत में ले लिया। अगले दिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने तीनों को रिहा कर दिया, लेकिन शर्त रखी कि वे एक साल तक शांति बनाए रखेंगे और 50,000 रुपये का बांड भरेंगे।11 अक्टूबर को जंतर-मंतर विरोध स्थल की सूची से हटाया गया। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने आदेश जारी कर जंतर-मंतर को "निर्धारित विरोध स्थल"की सूची से हटा दिया। गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिश पर रामलीला मैदान,बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को वैकल्पिक विरोध स्थल घोषित किया गया। CJP ने इस फैसले को"लोगों के मौलिक अधिकार पर हमला" बताया। 13 अक्टूबर उजंतर-मंतर में घुसपैठ और गिरफ्तारी के मद्देनजर सुबह करीब 6 बजे दास, रांका, अजिंक्य शिंदे और 11 अन्य CJP सदस्यों ने जनता दल (यूनाइटेड) कार्यालय के पीछे की एक संकरी गली का इस्तेमाल कर जंतर-मंतर में प्रवेश किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उन्होंने बंद लोहे का गेट फांदकर अंदर प्रवेश किया। तिरंगा लहराया और"भारत माता की जय" तथा"इंकलाब जिंदाबाद"के नारे लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त जनेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर 14 लोगों को हिरासत में ले लिया और उन्हें जाफराबाद पुलिस थाने ले गया‌ जो घटनास्थल से करीब 40 किलोमीटर दूर है। कानूनी पेच जाने तो क्या हैं आरोप और धाराएं? के मद्देनजर दर्ज मामले और धाराएं जाने तो दिल्ली पुलिस ने दो अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए हैं। वह जाने तो कनॉट प्लेस पुलिस थाने में BNSS की धारा 223A (अवैध प्रवेश), 332 (सरकारी कर्मचारी को काम में बाधा) और 61(2) के तहत मामला दर्ज। संसद मार्ग पुलिस थाने में BNSS की धारा 221(सार्वजनिक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा),115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना),132 (शांति भंग करने के आशय से हमला),121(1) (गंभीर चोट पहुंचाना)और 3(5) के तहत मामला दर्ज। शांति बांड के उल्लंघन मुख्य आधार के मद्देनजर मामले की अहम बात यह है कि दास और रांका ने 10 अक्टूबर की हिरासत के बाद एक साल तक शांति बनाए रखने का बांड भरा था। दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (नई दिल्ली) सचिन शर्मा के मुताबिक SEM अदालत ने दोनों को "कानून का बार-बार उल्लंघन"और"जमानत पर रिहा होने पर दोबारा कानून तोड़ने तथा दूसरों को उकसाने की गंभीर आशंका"के आधार पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने पुलिस के इस दावे को"पूरी तरह झूठा"बताया कि किसी ने दूसरे प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर आने की अपील की थी। शिंदे को राहत गई पर दास-रांका को नहीं दी गई। अजिंक्य शिंदे को SEM अदालत ने छह महीने तक शांति बनाए रखने की शर्त पर 5,000 रुपये के व्यक्तिगत बांड और जमानत पर रिहा कर दिया। यह अंतर इस बात को दर्शाता है कि अदालत ने दास और रांका को"बार-बार कानून तोड़ने वाले"के रूप में चिह्नित किया है । जबकि शिंदे के खिलाफ ऐसा पूर्व रिकॉर्ड नहीं था। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखें तो विपक्ष का एकजुट रुख बना हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि यह"कायरतापूर्ण कदम" है । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे "कायरतापूर्ण कदम"बताया और कहा कि"जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। जंतर-मंतर भारतीय जनता का है, हम इसे वापस लेंगे। अन्य विपक्षी नेताओं के मद्देनजर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि "तिरंगा फहराने के लिए आशुतोष रांका और सौरव दास को जेल भेजा गया। मोदी जी,युवाओं से पंगा मत लीजिए। वे जल्द ही आपकी तानाशाही खत्म कर देंगे। इंडिया ब्लॉक के कई नेता जैसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव,तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर दास और रांका का समर्थन किया है। दीपके का प्रधानमंत्री पर सीधा हमला। वह क्या उसे समझे तो दीपके ने X पर लिखा है कि आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनका अपराध? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना। थोड़ी हिम्मत दिखाइए @narendramodi। अगर आप dissent को दबाने के लिए इतने ही आतुर हैं तो साहस दिखाकर आपातकाल घोषित करें। इन कायरतापूर्ण तरीकों के पीछे छिपने के बजाय। व्यापक पृष्ठभूमि के मद्देनजर केवल एक घटना नहीं है बड़ा संघर्ष है । इसके विरोध का मूल कारण देखें तो यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त जनेश कुमार और मतदाता सूची के"विशेष गहन संशोधन"(SIR) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। CJP का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम गलती से हट सकते हैं। पहले भी हुई बड़ी कार्रवाई वह जाने तो 10 अक्टूबर को CJP के "जंतर-मंतर 2.0"प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें विपक्षी नेता, कार्यकर्ता,छात्र नेता और पत्रकार शामिल थे। रत्ना सिंह को कार में बंद कर दिया गया था। INDIA bloc का मार्च और FIR के मद्देनजर मामले को समझे तो 12 अक्टूबर को INDIA bloc ने मध्य दिल्ली में बिना अनुमति मार्च निकाला। जिसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में बाराखंभा रोड और तिलक मार्ग थानों में दो FIR दर्ज कीं। सुप्रीम कोर्ट के दखल के मद्देनजर देखें तो सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर कहा था कि जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है। वहां शांतिपूर्ण और निहत्थे सभाओं को हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेट्रो और रेल सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद पुलिस ने 12 अक्टूबर को भी कई लोगों को हिरासत में लिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम हर दिन शहर को घेराबंदी में नहीं रख सकते लेकिन यहां विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाएगा। नए विरोध स्थलों की समस्या के मद्देनजर रामलीला मैदान जिसे नए विरोध स्थल के रूप में नामित किया गया है। अगले ढाई महीने तक बुकिंग के लिए उपलब्ध नहीं है। केवल 29,30 और 31 दिसंबर की तारीखें खाली हैं। यह तथ्य इस आशंका को बल देता है कि वैकल्पिक स्थल व्यावहारिक रूप से विरोध के अधिकार को सीमित करने का जरिया बन सकते हैं। कानून और अधिकार के बीच की लड़ाई को जाने तो यह मामला केवल दो नेताओं की जेल यात्रा का नहीं है। यह इस बुनियादी सवाल से जुड़ा है कि क्या सरकार को यह तय करने का अधिकार है कि लोग कहां और कैसे विरोध कर सकते हैं। CJP का तर्क है कि जंतर-मंतर को हटाना प्रदर्शन को राजनीतिक केंद्र से दूर करने की कोशिश है। सरकार का कहना है कि यह कानून- व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधा का मामला है। दास और रांका की पांच दिन की न्यायिक हिरासत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत में मामला किस दिशा में जाता है और क्या यह विरोध प्रदर्शनों को और तेज करता है? जैसा कि दीपके ने कहा कि आज मोदी ने जंतर-मंतर रद्द कर दिया। कल वह लोकतंत्र रद्द कर देंगे।

~By √•Press wire MCP•Digital World•

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