*जंतर-मंतर विरोध से पहले दिल्ली में किले जैसी सुरक्षा;CJP का दावा,ध्रुव राठी गुरुग्राम से हिरासत में,पुलिस ने 500 लोगों को लिया हिरासत में*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*जंतर-मंतर विरोध से पहले दिल्ली में किले जैसी सुरक्षा;CJP का दावा,ध्रुव राठी गुरुग्राम से हिरासत में,पुलिस ने 500 लोगों को लिया हिरासत में*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*Press Wire । सीजेपी आंदोलन|10 Oct*
मुंबई| चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चरम पर रही। इसी बीच CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया है। CJP के मुताबिक सुबह करीब 8 बजे सादे कपड़ों में लगभग 50 पुलिसकर्मी राठी के घर पहुंचे। CJP ने अपनी पोस्ट में कहा कि विरोध के बीच दिल्ली पुलिस ने YouTuber @dhruv_rathee को गुरुग्राम में उनके घर से हिरासत में लिया। सुबह करीब 8 बजे सादे कपड़ों में करीब 50 पुलिसवाले ध्रुव राठी के घर पहुंचे। एक अन्य पोस्ट में CJP ने लिखा कि ध्रुव राठी को हिरासत में लिया गया है। तानाशाह उन नौजवानों से डरता है। जो उसके गलत कामों पर सवाल उठाते हैं और चुप रहने से इनकार करते हैं! CJP के अनुसार राठी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने आया था। CJP ने कुमार पर आरोप लगाया कि SIR की आड़ में मतदाता सूची से छेड़छाड़ की जा रही है और अपने दो साथियों को नजरअंदाज करके फॉर्म 6 में बदलाव किया गया। जो वोटर रजिस्ट्रेशन का एक जरूरी दस्तावेज है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
इससे पहले 8 अक्टूबर को राठी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में SIR के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन को प्रोग्रेसिव समूहों और विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के गठबंधन ने आयोजित किया था। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनाव के लिए EVM की जगह पेपर बैलेट पर लौटने की वकालत की। उन्होंने आरोप लगाया कि ECI, BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की “कठपुतली” बन गई है। राठी के अलावा अभिनेता-एक्टिविस्ट प्रकाश राज और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके भी प्रदर्शन में मौजूद थे।
दिल्ली में कड़ी सुरक्षा के मद्देनजर जंतर-मंतर की ओर बढ़ने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया। हरी और खाकी वर्दी में अर्धसैनिक बलों,BSF और RAF के जवानों ने संसद मार्ग थाना क्षेत्र के पास दिल्ली पुलिस के साथ मार्च किया। पुलिसकर्मियों के पास राइफल,भारी रकसैक और टैक्टिकल गियर थे। दिल्ली पुलिस की पिंक फोर्स, महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को लाठी और सुरक्षात्मक उपकरणों के साथ कई जगहों पर तैनात किया गया। लाउडस्पीकर से बार-बार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पाबंदियों की चेतावनी दी गई। पुलिस स्टेशन को डिप्लॉयमेंट सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया गया। जबकि NDMC पालिका केंद्र के पास सुरक्षा विशेष रूप से बढ़ाई गई। कनॉट प्लेस की ओर जाने वाले संसद मार्ग और टॉल्स्टॉय रोड को कई परतों के बैरिकेड्स से ब्लॉक कर दिया गया और सबसे आगे पुलिस कंपनियां तैनात थीं। पास की इमारतों में निजी सुरक्षा गार्डों को भीड़ प्रबंधन के निर्देश दिए गए। आने-जाने वालों, कार्यालय जाने वालों और प्रदर्शनकारियों में फर्क करने के लिए पहचान पत्र दिखाने को कहा गया और कई लोगों को वापस जाने के लिए कहा गया।दौरान दिल्ली पुलिस का बयान देखें तो
दिल्ली पुलिस ने कहा कि अलग-अलग जगहों से समूहों में आ रहे करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया गया। जबकि गड़बड़ी रोकने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा गया। दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था। हर जोन में एक तय डिटेंशन सेंटर बनाया गया और इसके लिए राजधानी भर के स्टेडियमों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे पहले कनॉट प्लेस में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स पार करके जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। दिल्ली-बदरपुर बॉर्डर पर मोहन एस्टेट के पास भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई और स्पाइक स्ट्रिप्स बिछाई गईं। ध्यान दें कि इस रिपोर्ट में CJP के दावों को उसके हवाले से और दिल्ली पुलिस के बयान को उसके हवाले से प्रस्तुत किया गया है। ध्रुव राठी की हिरासत से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। यहां पिछली रिपोर्ट से आगे की जानकारी जोड़ी गई है। जिसमें CJP का उद्भव,SIR विवाद की पृष्ठभूमि, दिल्ली पुलिस की नई रणनीति और ध्रुव राठी की हिरासत से जुड़े विवाद शामिल हैं। सीजेपी का उद्भव,मीम से आंदोलन तक देखें तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत एक मीम से हुई थी। 16 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की उस टिप्पणी के जवाब में जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से की थी। अभिजीत दीपके ने CJP का वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट लॉन्च किया। दीपके जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के कम्युनिकेशन विंग में काम कर चुके हैं और बोस्टन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। उसने इस टिप्पणी को एक नाम और आंदोलन के प्लेटफॉर्म में बदल दिया। CJP ने खुद को “आलसी और बेरोजगार की आवाज” कहते हुए बेरोजगारी,परीक्षा में देरी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सटायर के जरिए कैंपेन किया। इसका इंस्टाग्राम फॉलोइंग कुछ ही दिनों में 2 करोड़ से अधिक हो गया। जो भाजपा और कांग्रेस दोनों से ज्यादा था। जुलाई 2026 में CJP के संसद मार्च में हजारों लोग शामिल हुए और NEET पेपर लीक आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। SIR विवाद समझे तो 14 करोड़ वोटरों के नाम हटने का दावा किया जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया जून 2025 में बिहार से शुरू हुई और बाद में देश के कई राज्यों में फैल गई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान करीब 14 करोड़ वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए और उन्हें फिर से फॉर्म भरने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अकेले 2.96 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए। जो SIR वाले राज्यों में सबसे अधिक है। इसके अलावा 85,854 प्री-फिल्ड फॉर्म 7 दावा-आपत्ति की समय सीमा खत्म होने के बाद ERONet सॉफ्टवेयर के जरिए जेनरेट किए गए। जिस पर सवाल उठाए गए। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी फैसले सर्वसम्मति से और कानूनी रूप से वैध थे। दिल्ली पुलिस की नई रणनीति के हिसाब से 37 ब्लॉकिंग पॉइंट और 15 डिटेंशन सेंटर के मद्देनजर। इस बार दिल्ली पुलिस ने जुलाई के CJP आंदोलन की “दो बड़ी चूकों” से सबक लेते हुए एक “फेल-सेफ प्लान” तैयार किया। पुलिस ने जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के धरने या विरोध की इजाजत देने से इनकार कर दिया और सभी 15 जिलों में समर्पित डिटेंशन सेंटर बनाए। नई दिल्ली जिले में 37 ब्लॉकिंग पॉइंट बनाए गए, जिनमें से हर एक को किसी विशेष जिले या यूनिट को सौंपा गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पिछली बार दो गलतियां हुई थीं। पहली प्रदर्शनकारियों की संख्या का आकलन नहीं हो पाया और दूसरी एक ही जगह पर अलग-अलग यूनिट तैनात कर दी गईं। इस बार “एक पॉइंट,एक यूनिट”का फॉर्मूला अपनाया गया। इसके अलावा पुलिस ने राजधानी के होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच की और उन्हें निर्देश दिया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे नए लोगों को कमरा न दें। महिला पुलिसकर्मियों को आगे तैनात करने का फैसला भी किया गया, क्योंकि इनपुट मिले थे कि प्रदर्शनकारी महिलाओं को आगे करके पुलिसकर्मियों को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं। दौरान ध्रुव राठी की हिरासत के मद्देनजर नई जानकारी "द हिंदू" की रिपोर्ट के अनुसार ध्रुव राठी को दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित सेंट्रल पार्क विहार के एक फ्लैट से हिरासत में लिया गया। जहां वे अपने माता-पिता के साथ ठहरे हुए थे। उन्हें गुरुग्राम में एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। न्यू एज बांग्लादेश की रिपोर्ट के मुताबिक राठी को तब हिरासत में लिया गया जब उन्होंने दिल्ली जाकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके घर से हिरासत में ले लिया। राठी की हिरासत से पहले ही भाजपा के पूर्व आईपीएस अधिकारी और प्रवक्ता भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर राठी की नागरिकता और वीजा की जांच की मांग की थी। राव ने तर्क दिया कि एक विदेशी नागरिक भारत के संवैधानिक संस्थानों के कामकाज के खिलाफ आयोजित राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का कानूनी रूप से हकदार नहीं है और अगर विदेशी अधिनियम,1946 या वीजा शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई होनी चाहिए। राठी मूल रूप से हरियाणा के रोहतक से हैं और साल 2014-2015 में जर्मनी गए थे। जहां उन्होंने बैचलर और मास्टर डिग्री पूरी की। वे जर्मनी में रहते हुए यूट्यूब पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बनाते हैं और भाजपा सरकार की आलोचना के लिए जाने जाते हैं। हिरासत की कानूनी प्रक्रिया समझे तो पुलिस ने दावा किया कि सभी हिरासतें लागू कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार की गईं। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों को महिला पुलिस कर्मियों द्वारा संभाला गया और उनके साथ गरिमा के साथ व्यवहार किया गया। पुरुष प्रदर्शनकारियों को निर्धारित समय के भीतर विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए रिहा किया गया हालांकि इस बार की हिरासतों ने कई नई चुनौतियां खड़ी की हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने दिल्ली में चल रहे “ब्लैंकेट ट्रांजिट शट डाउन” के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया कि 9 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन करते हुए नागरिकों को परेशानी पहुंचाई जा रही है। पृष्ठभूमि में एक और अहम पहलू जाने तो CJP की संस्थापक अभिजीत दीपके को खुद भी दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने अनुमान लगाया था कि करीब 7,000 प्रदर्शनकारी राजधानी पहुंच सकते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मियों को अधिकतम संयम बरतने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय करने और प्रदर्शनकारियों को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने के लिए निवारक उपाय करने का निर्देश दिया था। यह भी ध्यान देने योग्य है कि CJP को खुद सरकारी एजेंसियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने CJP को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था और CJP के X हैंडल को ब्लॉक कर दिया गया था। जिसे दीपके ने अदालत में चुनौती दी है। नोट करें कि इस रिपोर्ट में CJP के दावों,कांग्रेस के आरोपों और पुलिस के बयानों को संबंधित पक्षों के हवाले से प्रस्तुत किया गया है। ध्रुव राठी की नागरिकता और हिरासत से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
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