*बॉन्ड मत भरो,विरोध जारी रहेगा:CEC के खिलाफ प्रदर्शन में 'पीस बॉन्ड' पर आर-पार,जानिए क्या है पूरा कानूनी विवाद*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*बॉन्ड मत भरो,विरोध जारी रहेगा:CEC के खिलाफ प्रदर्शन में 'पीस बॉन्ड' पर आर-पार,जानिए क्या है पूरा कानूनी विवाद*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*Press Wire Election Commission| 27Oct*
मुंबई| दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहा आंदोलन अब "पीस बॉन्ड"बनाम "लोकतांत्रिक अधिकार" की लड़ाई बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक प्रदर्शनकारी एडवोकेट खुलकर कह रहा है कि किसी भी आंदोलनकारी को पुलिस का दिया हुआ बॉन्ड नहीं भरना चाहिए। वीडियो में व्यक्ति कह रहा है कि ये सिर्फ आपको डराने की कार्रवाई है। बॉन्ड भरवा के आपको डराएंगे साथ ही उसने कहा कि हाँ,हम regime change चाहते हैं क्योंकि ये चोरी-चकारी की सरकार है। क्या है पूरा मामला? उसे समझे तो 16 अक्टूबर को मंडी हाउस पर AISA अध्यक्ष नेहा बोरा सहित 40-50 लोगों ने प्रदर्शन किया था। पुलिस के मुताबिक धारा 163 लागू होने के बावजूद वे नारेबाजी करते हुए कनॉट प्लेस की ओर बढ़े। हिरासत के बाद उन्हें SEM कोर्ट में पेश कर 10 हजार रुपये का मुचलका भरने को कहा गया। हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद भी नेहा बोरा ने साफ कहा है कि वह किसी शर्त पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना संविधान का दिया अधिकार है और पीस बॉन्ड को हथियार बनाकर विरोध को दबाया जा रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई का मकसद सजा देना नहीं बल्कि शांति भंग की आशंका को रोकना है। अगली सुनवाई मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में 29 अक्टूबर को तय है। पुलिस का "पीस बॉन्ड" बनाम लोकतांत्रिक विरोध के मद्देनजर दिल्ली के मंडी हाउस प्रदर्शन का विश्लेषण देखें तो दिल्ली के मंडी हाउस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुआ प्रदर्शन अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। पुलिस द्वारा शांति बनाए रखने के लिए बांटे गए"पीस बॉन्ड" (Peace Bond) और प्रदर्शनकारियों के"लोकतांत्रिक अधिकारों"के बीच छिड़ी इस जंग ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद की मुख्य जड़ देखें तो पीस बॉन्ड और कानूनी प्रावधान। मामला क्या है? वह जाने तो 16 अक्टूबर को मंडी हाउस पर AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत 40-50 प्रदर्शनकारियों ने धारा 163 का उल्लंघन कर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इन्हें हिरासत में लिया और SEM (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) कोर्ट में पेश किया। मुचलके की शर्त देखें तो कोर्ट और पुलिस ने शांति भंग की आशंका को रोकने के लिए 10,000 रुपये का मुचलका (बॉन्ड) भरने का निर्देश दिया। आंदोलनकारियों के विरोध के मद्देनजर प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों का साफ कहना है कि यह बॉन्ड विरोध की आवाज को कुचलने और डराने का एक प्रशासनिक हथकंडा है। वायरल वीडियो में एक एडवोकेट ने यह तक कह दिया कि बॉन्ड न भरकर वे इस "रिजीम चेंज"(सत्ता परिवर्तन) की लड़ाई को जारी रखेंगे। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क,पक्ष,मुख्य तर्क और दृष्टिकोण को लेकर प्रदर्शनकारी और छात्र नेता (AISA) संविधान प्रदत्त अधिकार। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना और विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। दमनकारी कार्रवाई के मद्देनजर पीस बॉन्ड जैसी शर्तों के जरिए सरकार और प्रशासन असहमति की आवाजों को दबाना चाहते हैं। नेहा बोरा का रुख साफ है कि वह इस शर्त पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। दिल्ली पुलिस और प्रशासन कानून और व्यवस्था । पुलिस का तर्क है कि धारा 163 लागू होने के बावजूद मार्च निकाला गया। जिससे व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था। निवारक कार्रवाई (Preventive Action) के मद्देनजर यह कदम किसी को सजा देने के लिए नहीं बल्कि भविष्य में शांति भंग की आशंका को रोकने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। आगे की कानूनी राह के हिसाब से इस मामले में कानूनी जंग भी तेज हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों को उच्च न्यायालय (High Court) से राहत नहीं मिली है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में तय की गई है। कोर्ट का यह फैसला तय करेगा कि इस कानूनी गतिरोध का आगे क्या रुख रहता है। यह पूरा घटनाक्रम इस बात की एक और मिसाल है कि कैसे प्रशासनिक सुरक्षा के उपाय और नागरिकों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं। 29 अक्टूबर की सुनवाई इस बात पर मुहर लगा सकती है कि प्रशासनिक आदेशों और नागरिक अधिकारों की इस खींचतान में आगे क्या कानूनी मोड़ आएगा।
*वीडियो देखने के लिए लिंक खोलें*
https://youtu.be/H0Lfdgop4Dc?si=_j4vedrRvQkUWxK1
~By √•Press Wire MCP• Digital World•

Comments
Post a Comment