*CEC ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप:SIR सॉफ्टवेयर, RTI विवाद और 1 नवंबर की रैली में शामिल होने का लोगो को न्यौता*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*CEC ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप:SIR सॉफ्टवेयर, RTI विवाद और 1 नवंबर की रैली में शामिल होने का लोगो को न्यौता*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



*Press Wire |election Commission|27 Oct*


मुंबई| कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 26 अक्टूबर सोमवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट करते हुए मोदी सरकार पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया है। खरगे ने दावा किया कि "वोट चोरी के अनगिनत खुलासों"के बावजूद सरकार हर संभव हथकंडा अपना रही है। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) पर निशाना साधते हुए कहा कि जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में इस्तेमाल हुए सॉफ्टवेयर की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई तो आयोग ने "व्यापार रहस्य"का हवाला देकर सूचना देने से इनकार कर दिया। आरटीआई और 'व्यापार रहस्य' के विवाद के मद्देनजर खरगे के इस दावे की पुष्टि स्वतंत्र रूप से दर्ज आरटीआई जवाब से होती है। सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए.मुजीब अय्यूब द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन के जवाब में चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को कहा कि वह SIR में उपयोग किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और संस्करण साझा नहीं करेगा क्योंकि यह"व्यावसायिक विश्वास,व्यापार रहस्य और बौद्धिक संपदा"से जुड़ा है। जो आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत छूट प्राप्त है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया है हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि आयोग ECINET सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी छिपा रहा है ताकि SIR के दौरान हुई "व्यापक,केंद्रीकृत हेराफेरी"की सच्चाई सामने न आए। SIR और मतदाता सूची पर आरोप के मद्देनजर खरगे ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है और पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद पूरे राज्य में फॉर्म 6, 7 और 8 की जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शिता की कमी बताते हुए इसे"वोट चोरी"करार दिया। विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें । वह कौन सी वह देखें तो खरगे ने INDIA गठबंधन की ओर से तीन "गैर-समझौता योग्य"मांगें रखीं। CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उन्हें संरक्षण देने वाले साल 2023 के कानून को निरस्त करना। SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकना और"अवैध रूप से हटाए गए"मतदाताओं के नाम बहाल करना। सभी चुनाव ईवीएम की जगह मतपत्र (बैलेट पेपर) से कराना। राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे के रास्ते के मद्देनजर खरगे ने इस मुद्दे को केवल चुनावी नहीं बल्कि"संविधान और लोकतंत्र बचाने की जनता की लड़ाई" बताया है और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ''सेव वोट्स–सेव द नेशन'' रैली में शामिल होने की अपील की है। वहीं भाजपा ने खरगे के बयान की निंदा करते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए हैं हालांकि कांग्रेस ने इसे पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं के पुराने बयानों का हवाला दिया है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है। जब चुनाव आयोग के भीतर भी SIR को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। जहां दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। सॉफ्टवेयर की पारदर्शिता पर सवाल और विपक्ष का एकजुट रुख आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों को निर्णायक मोड़ दे सकता है। यूपी मतदाता पंजीकरण विवाद पर खड़गे ने 16.18 लाख फॉर्म-6 के विवरण पर उठाए सवाल है। पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं की अनियमितताओं का दावा। इंडिया ब्लॉक की तीन मांगें दोहराईं। उत्तर प्रदेश में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पीलीभीत के रिकॉर्ड में 10,470 मतदाताओं से जुड़ी अनियमितताएं पाई गई हैं। कांग्रेस प्रमुख के अनुसार इसके बाद पूरे राज्य में फॉर्म 6,7 और 8 की जांच का आदेश देने के लिए संबंधित पक्ष को मजबूर होना पड़ा है। खड़गे ने कहा कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े ये मामले लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। फॉर्म-6 नए मतदाता पंजीकरण से फॉर्म-7 नाम हटाने या आपत्ति से और फॉर्म-8 मतदाता विवरण में सुधार से जुड़े आवेदनों के लिए होते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी को लेकर व्यापक जांच की जरूरत है। इसके अलावा खड़गे ने इंडिया ब्लॉक की तीन प्रमुख मांगों को दोहराया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उनकी रक्षा करने वाले 2023 के संबंधित कानून को निरस्त करने की बात कही। दूसरी मांग में उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और कथित तौर पर अवैध रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की अपील की। तीसरी मांग के तहत उन्होंने सभी चुनावों के लिए कागजी मतपत्रों की शुरूआत की वकालत की। खड़गे ने नागरिकों से विपक्ष के अभियान में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह सिर्फ वोट बचाने की लड़ाई नहीं है। यह संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए लोगों का संघर्ष है।”उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता, चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता और पारदर्शी मतदान प्रक्रिया सभी के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस प्रमुख द्वारा लगाए गए आरोपों और किए गए दावों को समाचार में उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मतदाता पंजीकरण,फॉर्म-6, 7 और 8 की जांच तथा एसआईआर से जुड़े मामलों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग से कोई प्रतिक्रिया इस इनपुट में शामिल नहीं है।

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