*वोटर लिस्ट पारदर्शिता पर कांग्रेस का हमला,जयराम रमेश ने CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा,SIR तुरंत रोकने की अपील;आयोग के 8 साल के रुख पर सवाल*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*वोटर लिस्ट पारदर्शिता पर कांग्रेस का हमला,जयराम रमेश ने CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा,SIR तुरंत रोकने की अपील;आयोग के 8 साल के रुख पर सवाल*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 




           *Press wire |  R. Jayram |18 Oct*


मुंबई। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर '‘वोट चोरी'’को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल रोकने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पिछले आठ वर्षों से राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां सर्च करने योग्य प्रारूप में उपलब्ध नहीं कराईं। जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से मतदाता सूचियों को सर्चेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराने की मांग करते रहे हैं लेकिन आयोग ने इस मांग को बार-बार खारिज किया। रमेश ने दावा किया कि 2018 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस को लाखों कथित फर्जी मतदाताओं का पता चला था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने सर्चेबल मतदाता सूचियां उपलब्ध कराना बंद कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा ‘'वोट चोरी'’को संभव बनाने के लिए किया गया। कांग्रेस नेता ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की तैयारी के मद्देनजर 15 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आयोग ने इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SSR के तहत राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां सर्चेबल प्रारूप में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इससे पहले चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। जयराम रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के मामले सामने आने पर केंद्र सरकार नए तरीके अपनाती है। रमेश ने मतदाता सूचियों में कथित फर्जी नाम जोड़ने और SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं से चुनाव आयोग के प्रति जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।कांग्रेस नेता ने कहा कि केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा बल्कि चुनाव आयोग और उसकी आईटी व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव किए जाने चाहिए। उन्होंने SIR को तत्काल निलंबित करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के मतदान के संवैधानिक अधिकार पर खतरा पैदा हो सकता है। रमेश ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूचियों तक राजनीतिक दलों की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया। इस मामले में कुछ सटीक और अतिरिक्त जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग का “यू-टर्न” और “सुप्रीम कोर्ट की रोक” का दावा समझे तो चुनाव आयोग ने 15 अक्टूबर 2026 को 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के SSR में राजनीतिक दलों को सर्चेबल PDF (मशीन-पठनीय) मतदाता सूची देने का निर्देश जारी किया। इसमें नाम जोड़ने-हटाने की अलग सूचियां और साप्ताहिक claim-objection सूचियां भी शामिल बताई जाती हैं लेकिन इससे पहले आयोग ने वर्षों तक यह मांग खारिज की। रिपोर्ट्स के मुताबिक CEC ज्ञानेश कुमार ने अगस्त 2025 में कहा था कि मशीन-पठनीय मतदाता सूची “सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित” है। फैक्ट-चेक में यह सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। आयोग ने जिस साल 2018 के फैसले का हवाला दिया। उसमें भी यह बात नहीं थी। कांग्रेस का सवाल यही है अगर आज सर्चेबल सूची दी जा सकती है तो  साल 2018, साल 2024 और साल 2025 के SIR के दौरान क्यों नहीं दी गई? साल 2018 मध्य प्रदेश मामले के आंकड़े के मद्देनजर कांग्रेस ने साल 2018 में मध्य प्रदेश के 101 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच में करीब 2.7 लाख संदिग्ध प्रविष्टियां पाई थीं। एक ही नाम,पिता का नाम और पता अलग-अलग जगह दोहराया गया था। पार्टी के अनुसार पूरे राज्य में अनुमानित 6 लाख ऐसी प्रविष्टियां थीं। चुनाव आयोग ने केवल 4 क्षेत्रों में टीम भेजी और शिकायतों को “असत्य” बताया। बाद में आयोग ने उसी सूची से करीब 2.4 लाख नाम हटाए लेकिन कहा कि इसका कांग्रेस की शिकायत से संबंध नहीं। उस चुनाव में कांग्रेस कुल 47,927 वोटों के अंतर से मध्य प्रदेश जीती थी। चुनाव आयोग ने 4 जनवरी 2018 से निर्देश दिया कि फील्ड अधिकारी केवल इमेज PDF (पेज की फोटो) जारी करें। जिससे कंप्यूटर से टेक्स्ट निकालकर सूचियों की क्रॉस-चेकिंग नहीं हो सके। यही “सर्चेबिलिटी”बंद होने का अहम बिंदु माना जाता है।‌“13 करोड़”के आंकड़े पर स्पष्टता देखें तो जयराम रमेश का दावा है कि SIR के पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ नाम हटाए गए। जो SIR-पूर्व सूची का 13% है। तीसरे चरण में 36.06 करोड़ कवर किए गए मतदाताओं में से 6.18 करोड़ हटाए गए।17% से अधिक 5.43 करोड़ को दस्तावेज पूरे करने का नोटिस मिला और उन पर हटाए जाने का जोखिम है। इस आधार पर कांग्रेस कहती है कि करीब 32% यानि लगभग एक-तिहाई मतदाता“हटाए जा चुके हैं या हटाए जाने के जोखिम में हैं”। भाजपा और चुनाव अधिकारियों का खंडन है कि इन 13 करोड़ में मृतक,अनुपस्थित (absent), डुप्लीकेट प्रविष्टियां आदि शामिल हैं। इन सभी को “योग्य मतदाता के अधिकार से वंचित” नहीं कहा जा सकता। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के “13 करोड़ वंचित” वाले दावे को “100% भ्रामक”बताया है यानि विवाद इस बात पर है कि इनमें कितने योग्य मतदाता हैं और कितने सिर्फ तकनीकी रूप से चिह्नित/साफ किए गए नाम हैं। CEC ज्ञानेश कुमार की पृष्ठभूमि और कांग्रेस के आरोप का आधार के हिसाब से ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं। वे अमित शाह के नेतृत्व वाले सहकारिता मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं और 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC बने। वे सहकारिता सचिव से सीधे CEC बनने वाले पहले अधिकारी बताए जाते हैं। कांग्रेस इसी पृष्ठभूमि को “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर काम करने” के आरोप का आधार बनाती है। दूसरी ओर 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने SIR के समर्थन में सार्वजनिक बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने CEC को तुरंत पद से हटाने से इनकार किया लेकिन केंद्र सरकार चुनाव आयोग और CEC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और कहा है कि चुनाव आयोग से अपेक्षा है कि वह सहमति से निर्णय ले। SSR की कानूनी प्रक्रिया और SIR से अंतर के मद्देनजर 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में SSR,लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत हो रहा है। अर्हता तिथि 1 जनवरी 2027 है। इस प्रक्रिया में BLO घर-घर सर्वे नहीं करेगा। 1 अप्रैल 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा पहले से आवेदन कर सकते हैं। चुनाव आयोग के 9 अक्टूबर 2026 के निर्देश (संख्या 23/Inst/2026-ERS) में Form-7 यानि नाम हटाने/आपत्ति वाली प्रविष्टियों की संख्या पर सीमा तय की गई है ताकि “दुर्भावनापूर्ण सामूहिक विलोपन”न हो सके। आयोग के अनुसार SSR का उद्देश्य सूची को अपडेट करना,नए मतदाता जोड़ना,त्रुटियां सुधारना और शुद्धता बढ़ाना है। यह SIR की सघन जांच और प्रक्रिया से अलग है। कांग्रेस की मांग है कि SIR तुरंत निलंबित हो,CEC का इस्तीफा हो,चुनाव आयोग और उसकी आईटी व्यवस्था में सुधार हो और मतदाता सूचियां पारदर्शी व आसानी से उपलब्ध हों। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि प्रक्रिया कानून के तहत और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है। खबर में कांग्रेस के आरोप और आयोग/भाजपा के खंडन दोनों पक्ष शामिल हैं।

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