*मतदाता सूची,जंतर-मंतर और पत्रकार सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख,केंद्र-चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस को नोटिस*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*मतदाता सूची,जंतर-मंतर और पत्रकार सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख,केंद्र-चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस को नोटिस*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*Press wire| Political |17Oct*
मुंबई | मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई करने और राजधानी में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार,भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त(CEC) ज्ञानेश कुमार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मतदाता सूची पर सवाल और चुनाव आयोग को नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया है। याचिकाओं में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई है। पीठ ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया है और अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर स्पष्टीकरण मांगने की बात कही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर भी नोटिस जारी किया गया है। जंतर-मंतर को डीनोटिफाई करने पर सवाल के बारे में जाने तो कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में डीनोटिफाई (अधिसूचना रद्द) किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार,दिल्ली सरकार और पुलिस को भी नोटिस जारी किया है। इसके अलावा विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों को CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के हिसाब से बीते 10 अक्टूबर को दिल्ली में''वोट चोरी''के आरोपों और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। धारा 163 लागू की गई और सेंट्रल दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया था। महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार के मामले के मद्देनजर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। आरोप है कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी ने उस पत्रकार को धक्का दिया। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कोर्ट ने इस मामले पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करने की सहमति जताई है और महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का संकेत दिया है। सुप्रीम कोर्ट के ये नोटिस चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता,विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ चुनाव आयोग और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई करने और राजधानी में हालिया विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार,भारत निर्वाचन आयोग (ECI),मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया है। याचिकाओं में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई है। पीठ ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिस पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने वोटिंग अधिकार पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि बिना सुनवाई किसी का वोट काटना''शरीर से आत्मा निकालने जैसा''है और संविधान में दो तरह के नागरिकों के लिए कोई जगह नहीं है। कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में डीनोटिफाई (अधिसूचना रद्द) किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार,दिल्ली सरकार और पुलिस को भी नोटिस जारी किया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर जंतर-मंतर को डीनोटिफाई किया गया था लेकिन केंद्र सरकार ने इस दावे से इनकार कर दिया है। CJI सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र से सवाल किया कि क्या यह फैसला कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया या फिर इस जगह की उपयोगिता पर विचार करने के बाद लिया गया। बीते 10 अक्टूबर को दिल्ली में ''वोट चोरी''के आरोपों और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, धारा 163 लागू की गई और सेंट्रल दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं। इस दौरान 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 11अक्टूबर को विशेष सुनवाई करते हुए दिल्ली में बैरिकेड्स हटाने,मेट्रो सेवाएं सामान्य करने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का आदेश दिया था। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में सेलुलर इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करना आवश्यक था। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया था। आरोप है कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी ने उस पत्रकार को धक्का दिया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट इस मामले की जांच करेगा और नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने इस मामले पर 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करने की सहमति जताई है और महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का संकेत दिया है। सुप्रीम कोर्ट के ये नोटिस चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ चुनाव आयोग और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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