*वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद सितंबर में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 9.43% बढ़ा;सोने के आभूषणों में 34% की छलांग*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद सितंबर में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 9.43% बढ़ा;सोने के आभूषणों में 34% की छलांग*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*Press wire | Diamond Industry| 15 Oct*
नई दिल्ली/मुंबई| जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने 14 अक्टूबर बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद भारत से रत्न और आभूषणों का निर्यात सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 9.43% बढ़कर 2.95 बिलियन डॉलर हो गया। सितंबर 2025 में यह निर्यात 2.70 बिलियन डॉलर था। यह वृद्धि भारतीय रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। जो वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं और व्यापारिक बाधाओं के बीच भी मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। जीजेईपीसी के आंकड़ों के अनुसार इस वृद्धि का मुख्य श्रेय सोने के आभूषणों और पॉलिश किए गए लैब-ग्रोन हीरों को जाता है। सितंबर में सोने के आभूषणों का निर्यात सालाना आधार पर 34.01% बढ़ा। जो इस श्रेणी में मजबूत मांग को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सोने के आभूषणों में यह उछाल त्योहारी सीजन की मांग,शादी-विवाह के मौसम और वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में स्थिरता के कारण हो सकता है। इसके अलावा लैब-ग्रोन हीरों की बढ़ती लोकप्रियता जो पर्यावरण के अनुकूल और किफायती विकल्प हैं। ने भी निर्यात को बल दिया है। भारत वैश्विक स्तर पर रत्न और आभूषणों का एक प्रमुख निर्यातक है और यह क्षेत्र देश के कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है हालांकि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मांग में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं फिर भी भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग ने लचीलापन दिखाया है। जीजेईपीसी का यह आंकड़ा आने वाले महीनों में निर्यात में स्थिर वृद्धि की उम्मीद जगाता है। बशर्ते वैश्विक स्थिति में सुधार हो और मांग बनी रहे। कुल मिलाकर सितंबर के निर्यात आंकड़े भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग के लिए उत्साहजनक हैं। सोने के आभूषणों और लैब-ग्रोन हीरों की मजबूत मांग ने निर्यात को नई ऊंचाई दी है। आने वाले त्योहारी सीजन और वैश्विक मांग में संभावित सुधार से इस क्षेत्र को और बल मिलने की उम्मीद है। भारत का रत्न-आभूषण निर्यात और ताकत,चुनौतियां और आगे की राह जाने तो रत्न और आभूषण क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र के प्रदर्शन ने उम्मीद जगाई है लेकिन इसके पीछे की बड़ी तस्वीर समझने के लिए कुछ अतिरिक्त और सटीक तथ्य जरूरी हैं। भारत की वैश्विक स्थिति पर नजर डालें तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा हीरा कटाई और पॉलिशिंग केंद्र है। सूरत में दुनिया के करीब 90% हीरे तराशे जाते हैं। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण क्षेत्र करीब 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। यह क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 7% और कुल merchandise निर्यात में करीब 15% का योगदान देता है। प्रमुख निर्यात बाजार के बारे में जाने तो भारतीय रत्न-आभूषण के प्रमुख बाजारों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), हांगकांग,बेल्जियम और इजराइल शामिल हैं। अमेरिका कट और पॉलिश किए गए हीरों तथा स्टडेड ज्वेलरी का सबसे बड़ा बाजार है। जबकि UAE सोने के आभूषणों के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य है। नीतिगत सुधारों का असर देखें तो जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क 15% से घटाकर 6% किया गया। इससे घरेलू आभूषण निर्माताओं की इनपुट लागत घटी और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी। इसके अलावा साल 2023-24 के बजट में लैब-ग्रोन हीरा बीज पर सीमा शुल्क 5% से शून्य किया गया। जिससे इस उभरते क्षेत्र को बल मिला। व्यापार समझौतों का लाभ जाने तो भारत-यूAE CEPA (मई 2022 से लागू) के तहत 99% भारतीय निर्यात को शून्य शुल्क पर पहुंच मिली है। जिससे सोने के आभूषणों के निर्यात को गति मिली। भारत- ऑस्ट्रेलिया ECTA और भारत-यूके FTA वार्ता से भी क्षेत्र को भविष्य में लाभ की उम्मीद है। दौरान लैब-ग्रोन हीरों के बढ़ते दबदबे के मद्देनजर पर्यावरण के अनुकूल और किफायती होने के कारण लैब-ग्रोन हीरों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत इस क्षेत्र में एक बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन रहा है। अमेरिका और यूरोप में इसकी मांग विशेष रूप से बढ़ी है। वैश्विक मंदी, अमेरिका और चीन में मांग में नरमी,जी7 देशों द्वारा रूसी हीरों पर प्रतिबंध,लाल सागर संकट से माल ढुलाई लागत में बढ़ोतरी और लैब-ग्रोन हीरों की कीमतों में तेज गिरावट जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनसे निर्यात की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। GJEPC द्वारा आयोजित IIJS प्रीमियर शो जैसे मंच, कौशल विकास पहल, डिजिटल नीलामी और ब्लॉकचेन आधारित ट्रेसबिलिटी से पारदर्शिता बढ़ रही है। सरकार की SEZ/EOU योजनाएं और''ब्रांड इंडिया''को बढ़ावा देने से निर्यात को नई ऊंचाई मिल सकती है। रत्न-आभूषण निर्यात में हालिया सुधार केवल एक महीने का उछाल नहीं बल्कि नीतिगत समर्थन,बाजार विविधीकरण और उत्पाद नवाचार का नतीजा है हालांकि वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सतर्कता और आगे के सुधार जरूरी हैं। विकिपीडिया पर इस विशिष्ट ताजा समाचार यानि सितंबर 2026 में भारत का रत्न-आभूषण निर्यात 9.43% बढ़ा। $2.95 बिलियन रहा। सोने के आभूषणों में 34.01% वृद्धि का कोई समर्पित पृष्ठ नहीं है। विकिपीडिया एक विश्वकोश है। समाचार पत्र नहीं (WP:NOTNEWS) इसलिए मासिक निर्यात आंकड़े वहाँ नियमित रूप से अपडेट नहीं होते हालांकि विकिपीडिया के संबंधित पृष्ठों पर इस क्षेत्र की पृष्ठभूमि, संरचना और महत्व के बारे में यह जानकारी मिलती हैं। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (GJEPC) के बारे में विकिपीडिया कहता है कि यह भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग की शीर्ष निर्यात संवर्धन संस्था है। इसकी स्थापना 1966 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। मुख्यालय मुंबई में है। देशभर में क्षेत्रीय कार्यालय हैं। यह "इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी शो"(IIJS) जैसे प्रमुख आयोजन कराती है। विकिपीडिया के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा हीरा कटाई और पॉलिशिंग केंद्र है। सूरत में दुनिया के लगभग 90% हीरे तराशे और पॉलिश किए जाते हैं। मुंबई,जयपुर, दिल्ली आदि भी महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यह उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देता है। भारत सोने के आभूषणों का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। आभूषण भारतीय संस्कृति, त्योहारों और विवाहों से गहराई से जुड़े हैं। हॉलमार्किंग और बीआईएस प्रमाणन का उल्लेख विकिपीडिया पर मिलता है। रत्न एवं आभूषण क्षेत्र भारत के प्रमुख विदेशी मुद्रा अर्जक क्षेत्रों में से एक है। यह कुल merchandise निर्यात में लगभग 15% और GDP में करीब 7% योगदान देता है। लगभग 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। विकिपीडिया के अनुसार लैब-ग्रोन हीरा रासायनिक और भौतिक रूप से प्राकृतिक हीरे के समान होता है। भारत इसका प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बन रहा है। सरकार ने इस क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया है। जिससे सूरत और अन्य केंद्रों में इसका विस्तार हुआ है। भारत-यूएई CEPA (2022) और भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA जैसे समझौतों का उल्लेख विकिपीडिया पर मिलता है। इनसे रत्न-आभूषण निर्यात को बाजार पहुंच और शुल्क लाभ मिला है हालांकि विकिपीडिया इस मामले में ताजा निर्यात आंकड़े नहीं बल्कि उद्योग की ऐतिहासिक, संस्थागत और आर्थिक पृष्ठभूमि देता है। सितंबर 2026 के 9.43% वृद्धि जैसे आंकड़ों के लिए GJEPC,PIB, वाणिज्य मंत्रालय या विश्वसनीय समाचार स्रोत देखने चाहिए। विकिपीडिया पर दी गई जानकारी को भी उसके संदर्भों के जरिए सत्यापित करना बेहतर होता है।
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